फैज अहमद फैज शायरी – हर रग-ए-खूं में फिर चरागा

हर रग-ए-खूं में फिर चरागा हो
सामने फिर वो बेनकाब आए
कर रहा था गम-ए-जहां का हिसाब
आज तुम याद बेहिसाब आए। – फैज अहमद फैज