हसरत मोहानी शायरी – उस ना-ख़ुदा के ज़ुल्म ओ

उस ना-ख़ुदा के ज़ुल्म ओ सितम हाए क्या करूँ
कश्ती मिरी डुबोई है साहिल के आस-पास – हसरत मोहानी