हसरत मोहानी शायरी – खन्दा-ए-अहले-जहाँ की मुझे परवा क्या

खन्दा-ए-अहले-जहाँ की मुझे परवा क्या थी,
तुम भी हंसते हो मेरे हाल पर,रोना है यही। – हसरत मोहानी