हसरत मोहानी शायरी – दिलों को फ़िक्र-ए-दो-आलम से कर

दिलों को फ़िक्र-ए-दो-आलम से कर दिया आज़ाद
तिरे जुनूँ का ख़ुदा सिलसिला दराज़ करे – हसरत मोहानी