हसरत मोहानी शायरी – फिर और तग़ाफ़ुल का सबब

फिर और तग़ाफ़ुल का सबब क्या है ख़ुदाया
मैं याद न आऊँ उन्हें मुमकिन ही नहीं है – हसरत मोहानी