इरफ़ान सिद्दीक़ी शायरी – ख़्वाहिशें तोड़ न डालें तिरे

ख़्वाहिशें तोड़ न डालें तिरे सीने का क़फ़स
इतने शह-ज़ोर परिंदों को गिरफ़्तार न रख – इरफ़ान सिद्दीक़ी