इरफ़ान सिद्दीक़ी शायरी – हवा की ज़द पे हमारा

हवा की ज़द पे हमारा सफ़र है कितनी देर
चराग़ हम किसी शाम-ए-ज़वाल ही के तो हैं – इरफ़ान सिद्दीक़ी