इरफ़ान सिद्दीक़ी शायरी – हवा गुलाब को छू कर

हवा गुलाब को छू कर गुज़रती रहती है
सो मैं भी इतना गुनहगार रहना चाहता हूँ – इरफ़ान सिद्दीक़ी