जिगर मुरादाबादी शायरी – ख़याल-ए-यार सलामत तुझे ख़ुदा रक्खे

ख़याल-ए-यार सलामत तुझे ख़ुदा रक्खे
तेरे बग़ैर कभी घर में रौशनी न हुई – जिगर मुरादाबादी