जिगर मुरादाबादी शायरी – तबीयत इन दिनों बेगा़ना-ए-ग़म होती

तबीयत इन दिनों बेगा़ना-ए-ग़म होती जाती है
मेरे हिस्से की गोया हर ख़ुशी कम होती जाती है – जिगर मुरादाबादी