जिगर मुरादाबादी शायरी – तिरी ख़ुशी से अगर ग़म

तिरी ख़ुशी से अगर ग़म में भी ख़ुशी न हुई
वो ज़िंदगी तो मोहब्बत की ज़िंदगी न हुई – जिगर मुरादाबादी