जिगर मुरादाबादी शायरी – बहुत हसीन सही सोहबतें गुलों

बहुत हसीन सही सोहबतें गुलों की मगर
वो ज़िंदगी है जो काँटों के दरमियाँ गुज़रे – जिगर मुरादाबादी