जिगर मुरादाबादी शायरी – शरमा गए लजा गए

शरमा गए, लजा गए, दामन छुड़ा गए,
ऐ इश्क़ मरहबा! वो यहाँ तक तो आ गए…!!! – जिगर मुरादाबादी