जिगर मुरादाबादी शायरी – सदाक़त हो तो दिल सीनों

सदाक़त हो तो दिल सीनों से खिंचने लगते हैं वाइज़
हक़ीक़त ख़ुद को मनवा लेती है मानी नहीं जाती – जिगर मुरादाबादी