ख़ुमार बाराबंकवी शायरी – ये मिसरा नहीं है वज़ीफा

ये मिसरा नहीं है वज़ीफा मेरा है
खुदा है मुहब्बत, मुहब्बत खुदा है – ख़ुमार बाराबंकवी