मीर तक़ी मीर शायरी – आग थे इब्तेदा-ऐ-इश्क़ में हम

आग थे इब्तेदा-ऐ-इश्क़ में हम.,
हो गए ख़ाक, इन्तेहाँ है ये..।। – मीर तक़ी मीर