मीर तक़ी मीर शायरी – इश्क़ में जी को सब्र-ओ-ताब

इश्क़ में जी को सब्र-ओ-ताब कहाँ
उस से आँखें लगीं तो ख़्वाब कहाँ – मीर तक़ी मीर