मीर तक़ी मीर शायरी – पत्ता पत्ता बूटा बूटा हाल

पत्ता पत्ता बूटा बूटा हाल हमारा जाने है
जाने न जाने गुल ही न जाने बाग़ तो सारा जाने है – मीर तक़ी मीर