मीर तक़ी मीर शायरी – याद उसकी इतनी ख़ूब नहीं

याद उसकी इतनी ख़ूब नहीं ‘मीर’ बाज़ आ
नादान फिर वो जी से भुलाया न जाएगा – मीर तक़ी मीर