मिर्ज़ा ग़ालिब शायरी – क्यूँ गर्दिश-ए-मुदाम से घबरा न

क्यूँ गर्दिश-ए-मुदाम से घबरा न जाए दिल,
इन्सान हूँ पियाला-ओ-साग़र नहीं हूँ मैं. – मिर्ज़ा ग़ालिब