नक़्श लायलपुरी शायरी – मैं भी रसमन तअल्लुक़ निभाता

मैं भी रसमन तअल्लुक़ निभाता रहा
वो भी अक्सर मिला सोचते-सोचते – नक़्श लायलपुरी