नक़्श लायलपुरी शायरी – मैं हूँ महबूब अंधेरों का

मैं हूँ महबूब अंधेरों का मुझे हैरत है
कैसे पहचान लिया तुमने उजालो मुझको – नक़्श लायलपुरी