नक़्श लायलपुरी शायरी – रुह की प्यास बुझा दी

रुह की प्यास बुझा दी है तेरी क़ुरबत ने।।
तू कोई झील है, झरना है, घटा है, क्या है।। – नक़्श लायलपुरी