क़ाबिल अजमेरी शायरी – ज़माने की शिकायत क्या ज़माना

ज़माने की शिकायत क्या ज़माना किस की सुनता है
मगर तुम ने तो आवाज़-ए-जुनूँ पहचान ली होती – क़ाबिल अजमेरी