अल्लामा इक़बाल शायरी – न तू ज़मीं के लिए

न तू ज़मीं के लिए है, न आसमाँ के लिए..
जहाँ है तेरे लिए, तू नहीं जहाँ के लिए.! – अल्लामा इक़बाल

Allama Iqbal Shayari Urdu

अल्लामा इक़बाल शायरी – माना कि तेरी दीद के

माना कि तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूँ मैं
तू मेरा शौक़ देख मिरा इंतिज़ार देख – अल्लामा इक़बाल

अल्लामा इक़बाल शायरी – बातिल से दबने वाले ऐ

बातिल से दबने वाले ऐ आसमाँ नहीं हम
सौ बार कर चुका है तू इम्तिहाँ हमारा – अल्लामा इक़बाल