क़तील शिफ़ाई शायरी – गर्मी-ए-हसरत-ए-नाकाम से जल जाते हैं

गर्मी-ए-हसरत-ए-नाकाम से जल जाते हैं
हम चराग़ों की तरह शाम से जल जाते हैं – क़तील शिफ़ाई

क़तील शिफ़ाई शायरी – हम उसे याद बहुत आएँगे

हम उसे याद बहुत आएँगे
जब उसे भी कोई ठुकराएगा
काएनात उस की मेरी ज़ात में है
मुझ को खो कर वो किसे पाएगा – क़तील शिफ़ाई

क़तील शिफ़ाई शायरी – रह गई थी कुछ कमी

रह गई थी कुछ कमी रूसवाइयो में
फिर “क़तील” उस दर पे जाना चाहता हूँ – क़तील शिफ़ाई