अल्लामा इक़बाल शायरी – न तू ज़मीं के लिए

न तू ज़मीं के लिए है, न आसमाँ के लिए..
जहाँ है तेरे लिए, तू नहीं जहाँ के लिए.! – अल्लामा इक़बाल

Allama Iqbal Shayari Urdu

अहमद फ़राज़ शायरी – वो ख़ार ख़ार है शाख़-ए-गुलाब

वो ख़ार ख़ार है शाख़-ए-गुलाब की मानिंद
मैं ज़ख़्म ज़ख़्म हूँ फिर भी गले लगाऊँ उसे – अहमद फ़राज़

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नक़्श लायलपुरी शायरी – सींचा था जिस को ख़ूने

सींचा था जिस को ख़ूने तमन्ना से रात दिन
गुलशन में उस बहार के हक़दार हम नहीं – नक़्श लायलपुरी