अहमद फ़राज़ शायरी – वो ख़ार ख़ार है शाख़-ए-गुलाब

वो ख़ार ख़ार है शाख़-ए-गुलाब की मानिंद
मैं ज़ख़्म ज़ख़्म हूँ फिर भी गले लगाऊँ उसे – अहमद फ़राज़

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अहमद फ़राज़ शायरी – दिल के रिश्तों कि नज़ाक़त

दिल के रिश्तों कि नज़ाक़त वो क्या जाने ‘फ़राज़’,
नर्म लफ़्ज़ों से भी लग जाती हैं चोटें अक्सर!! – अहमद फ़राज़

अहमद फ़राज़ शायरी – जुदाइयाँ तो मुक़द्दर हैं फिर

जुदाइयाँ तो मुक़द्दर हैं फिर भी जान-ए-सफ़र
कुछ और दूर ज़रा साथ चल के देखते हैं – अहमद फ़राज़

अहमद फ़राज़ शायरी – अब ज़मीं पर कोई गौतम

अब ज़मीं पर कोई गौतम न मोहम्मद न मसीह,
आसमानों से नए लोग उतारे जाएँ। – अहमद फ़राज़