नासिर काज़मी शायरी – कुछ यादगार-ए-शहर-ए-सितमगर ही ले चलें आये

कुछ यादगार-ए-शहर-ए-सितमगर ही ले चलें
आये हैं इस गली में तो पत्थर ही ले चलें – नासिर काज़मी