निदा फ़ाज़ली शायरी – हर तरफ हर जगह बेशुमार

हर तरफ हर जगह बेशुमार आदमी,
फिर भी तनहाइयों का शिकार आदमी
सुबह से शाम तक बोझ ढोता हुआ,
हर तरफ आदमी का शिकार आदमी..!! – निदा फ़ाज़ली

निदा फ़ाज़ली शायरी – जाने कब चाँद बिखर जाये

जाने कब चाँद बिखर जाये जंगल में…
घर कि चौखट पे कोई दीप जलाते रहिये…!!! – निदा फ़ाज़ली

निदा फ़ाज़ली शायरी – हर एक बस्ती बदलती है

हर एक बस्ती बदलती है रंग रूप कई
जहाँ भी सुब्ह गुज़ारो उधर ही शाम करो – निदा फ़ाज़ली