फिराक गोरखपुरी शायरी – अभी कुछ और हो इन्सान

अभी कुछ और हो इन्सान का लहू पानी
अभी हयात के चेहरे पे आब-ओ-ताब नहीं – फिराक गोरखपुरी

फिराक गोरखपुरी शायरी – कोई नयी ज़मीं हो

कोई नयी ज़मीं हो, नया आसमां भी हो
ए दिल अब उसके पास चले, वो जहां भी हो – फिराक गोरखपुरी

फिराक गोरखपुरी शायरी – न पूछ क्या काम कर

न पूछ क्या काम कर गई है, दिलो-नज़र में उतर गई है
तेरी नज़र सब को आज़माए, तेरी नज़र कौन आज़माए – फिराक गोरखपुरी