मीर तक़ी मीर शायरी – इश्क़ में जी को सब्र-ओ-ताब

इश्क़ में जी को सब्र-ओ-ताब कहाँ
उस से आँखें लगीं तो ख़्वाब कहाँ – मीर तक़ी मीर

मीर तक़ी मीर शायरी – आग थे इब्तेदा-ऐ-इश्क़ में हम

आग थे इब्तेदा-ऐ-इश्क़ में हम.,
हो गए ख़ाक, इन्तेहाँ है ये..।। – मीर तक़ी मीर

मीर तक़ी मीर शायरी – अब तो जाते हैं बुत-कदे

अब तो जाते हैं बुत-कदे से ‘मीर’
फिर मिलेंगे अगर ख़ुदा लाया – मीर तक़ी मीर