शाद अज़ीमाबादी शायरी – बहुत दिनेां पे मिरी चश्‍म

बहुत दिनेां पे मिरी चश्‍म में नज़र आया
ऐ अश्‍क ख़ैर तो है तू किधर किधर आया – शाद अज़ीमाबादी

शाद अज़ीमाबादी शायरी – तन्हा है चराग़ दूर परवाने

तन्हा है चराग़ दूर परवाने हैं
अपने थे जो कल आज वो बेगाने हैं – शाद अज़ीमाबादी

शाद अज़ीमाबादी शायरी – कौन सी बात नई ऐ

कौन सी बात नई ऐ दिल-ए-नाकाम हुई
शाम से सुब्ह हुई सुब्ह से फिर शाम हुई – शाद अज़ीमाबादी

शाद अज़ीमाबादी शायरी – ढूँडोगे अगर मुल्कों मुल्कों मिलने

ढूँडोगे अगर मुल्कों मुल्कों मिलने के नहीं नायाब हैं हम
जो याद न आए भूल के फिर ऐ हम-नफ़सो वो ख़्वाब हैं हम – शाद अज़ीमाबादी