साग़र सिद्दीक़ी शायरी – हूरों की तलब और मय

हूरों की तलब और मय ओ साग़र से है नफ़रत
ज़ाहिद तिरे इरफ़ान से कुछ भूल हुई है – साग़र सिद्दीक़ी

साग़र सिद्दीक़ी शायरी – जिन से ज़िंदा हो यक़ीन-ओ-आगही

जिन से ज़िंदा हो यक़ीन-ओ-आगही की आबरू,
इश्क़ की राहों में कुछ ऐसे गुमाँ करते चलो !! – साग़र सिद्दीक़ी

साग़र सिद्दीक़ी शायरी – कल जिन्हें छु नहीं सकती

कल जिन्हें छु नहीं सकती थी फ़रिश्तों की नज़र
आज वो रौनक़ ~ए~बाज़ार नज़र आते हैं .. – साग़र सिद्दीक़ी