हफ़ीज़ जालंधरी शायरी – लुत्फ़ आने लगा जफ़ाओं में

लुत्फ़ आने लगा जफ़ाओं में
वो कहीं मेहरबां न हो जाए – हफ़ीज़ जालंधरी

हफ़ीज़ जालंधरी शायरी – मुद्दतों तक जो पढ़ाया किया

मुद्दतों तक जो पढ़ाया किया उस्ताद मुझे
इश्क़ में भूल गया कुछ न रहा याद मुझे – हफ़ीज़ जालंधरी

हफ़ीज़ जालंधरी शायरी – सुकून-ए-ज़िंदगी तर्क-ए-अमल का नाम है

सुकून-ए-ज़िंदगी तर्क-ए-अमल का नाम है शायद
न ख़ुश होता हूँ आसाँ से न घबराता हूँ मुश्किल से – हफ़ीज़ जालंधरी