ज़फ़र इक़बाल शायरी – सब को मालूम है और

सब को मालूम है और हौसला रखता हूँ अभी
अपने लिक्खे हुए को ख़ुद ही मिटा देने का – ज़फ़र इक़बाल

ज़फ़र इक़बाल शायरी – ज़ियादा नाज़ अब क्या कीजिए

ज़ियादा नाज़ अब क्या कीजिए जोश-ए-जवानी पर
कि ये तूफ़ाँ भी रफ़्ता रफ़्ता साहिल होने वाला है – ज़फ़र इक़बाल

ज़फ़र इक़बाल शायरी – वो सूरत देख ली हम

वो सूरत देख ली हम ने तो फिर कुछ भी न देखा
अभी वर्ना पड़ी थी एक दुनिया देखने को – ज़फ़र इक़बाल