मुनव्वर राना शायरी – हम परिंदो की तरह सुबह

हम परिंदो की तरह सुबह से दाने के लिए
घर से चल पड़ते है कुछ पैसे कमाने के लिए । – मुनव्वर राना

राहत इंदौरी शायरी – प्यास अगर मेरी बुझा दे

प्यास अगर मेरी बुझा दे तो मैं जानू,
वरना तू समंदर है तो होगा,मेरी किस काम का है. – राहत इंदौरी

मुनव्वर राना शायरी – हम ईंट-ईंट को दौलत से

हम ईंट-ईंट को दौलत से लाल कर देते,
अगर ज़मीर की चिड़िया हलाल कर देते – मुनव्वर राना